जिनेन्द्र वाणी

श्री अभिनंदननाथ भगवान की आरती

चौथे तीर्थंकर

दीपक के साथ आरती खोलें

ॐ जय अभिनंदन स्वामी, प्रभु जय अभिनंदन स्वामी।चौथे तीर्थंकर जिनवर, तुम अंतरयामी॥

  1. नगर अयोध्या जन्म लिया प्रभु, सब जग हरषाया।पिता स्वयंवर, माँ सिद्धार्था, मंगल दिन आया॥ॐ जय अभिनंदन स्वामी…

  2. माघ सुदी बारस को जन्मे, सुरगण सब आए।मेरु शिखर पर न्हवन कराकर, जय-जय गुण गाए॥ॐ जय अभिनंदन स्वामी…

  3. राज-पाट सब तृण सम त्यागा, दीक्षा व्रत धारा।पौष सुदी चौदस को प्रगटा, केवल उजियारा॥ॐ जय अभिनंदन स्वामी…

  4. कपि का चिह्न चरण में सोहे, कंचन-सी काया।दिव्यध्वनि सुनकर भविजन ने, शिव-मारग पाया॥ॐ जय अभिनंदन स्वामी…

  5. वैशाख सुदी छठ के दिन स्वामी, सब कर्म नशाए।गिरि सम्मेदशिखर से प्रभु जी, शिवपुर को पाए॥ॐ जय अभिनंदन स्वामी…

  6. घृत का दीपक थाल सजाकर, आरति हम गावें।भव-भव के दुख दूर करो प्रभु, शिव-सुख हम पावें॥ॐ जय अभिनंदन स्वामी…

॥ जय जिनेन्द्र ॥

भगवान अभिनंदननाथ के कल्याणक

  1. ज्ञान कल्याणक12 जनवरी 2025 · पौष शुक्ल चतुर्दशी
  2. जन्म व तप कल्याणक9 फ़रवरी 2025 · माघ शुक्ल द्वादशी
  3. गर्भ व मोक्ष कल्याणक2 मई 2025 · वैशाख शुक्ल पंचमी
  4. ज्ञान कल्याणक2 जनवरी 2026 · पौष शुक्ल चतुर्दशी
  5. जन्म व तप कल्याणक30 जनवरी 2026 · माघ शुक्ल द्वादशी
  6. गर्भ व मोक्ष कल्याणक22 अप्रैल 2026 · वैशाख शुक्ल षष्ठी

भगवान अभिनंदननाथ से जुड़े तीर्थ

  1. अयोध्यागर्भ, जन्म, तप व ज्ञान कल्याणक · अयोध्या, उत्तर प्रदेश
  2. श्री सम्मेद शिखरजीमोक्ष कल्याणक · मधुबन, गिरिडीह, झारखंड

भगवान अभिनंदननाथ की पूजा

  1. श्री अभिनंदननाथ जिन पूजाकविवर वृन्दावन